Home News नेपाली बाबा के नाम से प्रसिद्ध इस सिद्धनाथ मंदिर की जानिए कहानी, शिवरात्रि पर लगती है श्रद्धालुओं की भारी भीड 

नेपाली बाबा के नाम से प्रसिद्ध इस सिद्धनाथ मंदिर की जानिए कहानी, शिवरात्रि पर लगती है श्रद्धालुओं की भारी भीड 

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नेपाली बाबा के नाम से प्रसिद्ध इस सिद्धनाथ मंदिर की जानिए कहानी, शिवरात्रि पर लगती है श्रद्धालुओं की भारी भीड 

कृष्णा कुमार गौड़/जोधपुर. आज महाशिवरात्रि का पर्व है लिहाजा भगवान शिव के भक्तों में सुबह से ही अलग-अलग आयोजनों को लेकर उत्साह देखने को मिल रहा है. मगर आज हम आपको एक जोधपुर में ऐसे शिव मंदिर से अवगत कराएंगे जो जोधपुर के तखतसागर की पहाडियों में सिद्धनाथ धाम है जो जोधपुर शहर से करीब 9 किलोमीटर की दूरी पर है. इस मंदिर के प्रति श्रद्धालुओं की अटूट आस्था है.

हर सोमवार यहां भक्तों की भीड लगी रहती है और शिवरात्रि का समय तो ऐसा रहता है कि यहां पैर रखने तक की जगह नही रहती। यह मंदिर करीब 800 वर्ष पूराना है. तखत सागर की पहाड़ियों में स्थित सिद्धनाथ धाम के परमयोगी संत नारायण स्वामी, मौनी नेपाली बाबा, जोधपुर के आध्यात्मिक क्षेत्र की महान विभतियां थी। दादा दरबार सिद्धनाथ महादेव मंदिर शहरवासियों का प्रमुख आस्था स्थल है.

सिद्धनाथ में ऐसे बनी तपोस्थली
परम योगी संत नारायण स्वामी 1932 में संत एकनाथ रानाडे के साथ जब जोधपुर आए, तब सिद्धनाथ पहाड़ियों में छोटा सा महादेव मंदिर और पास में ही एक गुफा के दर्शन किए. क्षेत्र की प्राकृतिक छटा तथा निर्जन शांत वातावरण देखकर नारायण स्वामी ने तपस्या और साधना के लिए स्थान को उपयुक्त समझकर सिद्धनाथ को अपनी तपोस्थली बनाया.

नेपाली बाबा के नाम से प्रसिद्ध
जोधपुर का सिद्धनाथ धाम नेपाल बाबा के नाम से भी विश्वप्रसिद्ध है. 1970 के दशक में संत नारायण स्वामी ब्रह्मलीन होने के बाद सत्रहवीं को उन्हीं के शिष्य गौरीशंकर को उनका उत्तराधिकारी घोषित किया गया, जो बाद में संत नेपाली बाबा के नाम से प्रसिद्ध हुए. अपने गुरु नारायण स्वामी के ब्रह्मलीन होने पर नेपाली बाबा ने गुरु भक्ति से प्रेरित होकर नारायण स्वामी के एक सामान्य समाधि स्थल के स्थान पर एक भव्य समाधि निर्माण का कार्य शुरू किया. साथ ही, नेपाली बाबा ने सिद्धनाथ मंदिर का भी विस्तार कर उसे एक नया कलात्मक रूप प्रदान किया. आज भी श्रद्धालुओं की यहां अटूट आस्था और विश्वास बना हुआ है.

355 सीढियां चढने के बाद ही कर पाएंगे दर्शन
सिद्धनाथ धाम में आने वाले साधु-संतों के लिए संत निवास भोजनशाला, गौशाला आदि का भी निर्माण किया गया.सिद्धनाथ धाम पर पहुंचने के लिए पहाड़ी के पथरीले मार्ग पर अपने अथक परिश्रम से 355 सीढ़ियों का निर्माण किया. नेपाली बाबा ने स्वयं अपने दिव्यांग हाथों में छेनी-हथोड़ा थाम कर समाधि के लिए पत्थरों को तराशते थे। श्रद्धालुओं को मंदिर तक पहुंचने में काफी परिक्षम करना पडता है.

1990 में ब्रह्मलीन हुए नेपाली बाबा
नेपाली बाबा का मूल नाम दरअसल गौरीशंकर था, जो नेपाल से जोधपुर आए थे. सदैव मौन रहने के कारण उन्हें मौनी बाबा भी कहा जाता था. 10 फरवरी 1990 को नेपाली बाबा ने अपनी नश्वर देह त्यागकर ब्रह्मलीन हुए. वर्तमान में पंचदशनाम जूना अखाड़ा के मुनिश्वर गिरि मंदिर के महंत है, जो सिद्धनाथ धाम व अचलनाथ मंदिर का संचालन करते है.

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